अधिकरजनी में सूरज उग्यो सा, अचम्भो ऐसो आवे
अधिकहो गुरुदेव सम दातार जग में हुओ न कोई होय रे
अधिकधन धन हे सजनी, भला ऊगा भाण
अधिकहे सहेल्या भाण उग्यो ये बडो दिन आज