अधिकसजन सब आयु जावे रे इयां इयां इयां
अधिकसत गुरु दाता सा, प्रीत पुराणी पाली कियो उपकार
अधिकपदमण पिव पिछाणो घर नार
अधिकही मना मन रलिया का मेला रे