अधिकधन्य वांकी माता पिता देव धन्य हो
अधिकप्यारो घणो लागे माने देश मरुधर
अधिकसजनी मैं हूँ पियाजी री दासी ये
अधिकहाँ वाचक ज्ञान सीख कर मूर्ख पची करण का पाठ करे