अधिकमन रे मनुष्य तन क्यों खोवे
अधिकगुरां सा म्हारी सायल बेग सुणीज्यो
अधिकमना रे तू कर निर्भय सतसंग
अधिकशोभा वो सतसंग री, जहां बड भागी जन पाय