अधिकसजन मन जागे ये, दोनों फरके नैन
अधिकसत गुरु स्वामी मेरे मुकुट मणी है
अधिकधन्य धन्य हो साहेब, जाऊँ बलिहारा
अधिकसूरत लागे सुहावनी ये हेली