अधिकसजन सब आयु जावे रे इयां इयां इयां
अधिकसत गुरु दाता सा, प्रीत पुराणी पाली कियो उपकार
अधिकपदमण पिव पिछाणो घर नार
अधिकही मना मन रलिया का मेला रे
अधिकबधावा ऐसा नित नवलाये आली, सत गुरु ब्रह्म स्वरुप
अधिकसत गुरु महा सूरन का सूर, जिनका नाम नित्य मशहूर
अधिकऐसा भोला शम्भु देख्या, साधो तप धारी
अधिकऐसो राम रमैयो पायो, उर मांही