अधिकवो दिन भाग्य हमारा सजन परम गुरु पावणा रे
अधिकहे मना रे सत गुरु महिमा जान
अधिकपरम गुरु अरज मेरी सुनावोगे तो क्या होगा
अधिकहे मना मन मोहन सत गुरु श्याम।