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विद्या पढनें में प्रेम लगाया करो

 बाल शिक्षा पद राग गजल दादरा नं॰ १३६

विद्या पढनें में प्रेम लगाया करो।
गुरु के चरणों में शीश निवाया करो॥टेर॥

गुरु नित्य दातार है ईश के अवतार है।
महिमा अगम अपार है, विद्या के भण्डार है।
उनकी आज्ञा का मान बढाया करो॥१॥

प्रात: जल्दी उठ कर पितु मात को प्रणाम करो।
पाठ्य पुस्तक लेय साथ सचेत बन आया करो।
अपने पाठ से धुन लगाया करो॥२॥

इन्द्रिय संयम धार कर एकसा ध्यान करते रहो।
काक जैसी चेष्टा लगाकर रखते रहो।
सह पाठियो से प्रेम दिखाया करो॥३॥

सदाचार को धार कर अभ्यास नित्य करते रहो।
सीखे हुये को याद रख आगे को बढते रहो।
तुम औरो को शब्द सुनाय करो॥४॥

विद्या ही भगवान है विद्या के आधीन रहो।
स्वामी दीप कहे बालको, सत्य धर्म पर अटल रहो।
सत पुरुषो का संग किया ही करो॥५॥