धन धन हो स्वामी, अभय पद दीना
पद राग सोहनी नं॰ ११५
धन धन हो स्वामी, अभय पद दीना।
अभय पद दीना स्वामी निर्भय कीना॥टेर॥
आऊं नहीं जाऊं, मरु नहीं जन्मू।
ऐसा है आप अचल पद लीना॥१॥
मैं हू अटल आप अविनाशी।
अजरा चेतन ब्रह्म सोहं पद चीना॥२॥
मैं हूँ सत्य स्वरुप प्रकाशी।
अजराअमर अनमोल नगीना॥३॥
मैं हूँ निर्लेप एक सुख राशी।
नित्यानन्द सुख आप रंगीना॥४॥
श्री दीप कहे अनुभव पद वाणी।
सुरती संत सब वेद का कहना॥५॥