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बिरहनी बदरियां बरसे, सघन घन

 पद राग म्याम कल्याण नं॰ ५१

बिरहनी बदरियां बरसे, सघन घन।
क्षीर सागर उलटयो वालो,
भिज्यो तन मन॥टेर॥

झरुर झरुर हर हर हर बरसे,
सोहं सोहं गरजे गगन॥१॥

दशों दिशा सू बादल उलटयो,
झड लागो बरसन छन॥२॥

अनहद मेघ घरे दशवें में भूल,
हल भलक दमन॥३॥

श्री दीप स्वामी सुधा जल बरसे,
भयो मस्त लगन मन॥४॥